हे कान्हा !
जो मैं होती तेरी सखी
रहती सदा तेरे संग ......
सांझ -सवेरे से
होती तेरे साथ, थामें हाथ .......
घूमा करती वन -उपवन
लुका छिपी खेलती
तेर संग ........
माखन चुराती ,मटकी फोड़ती
भागती तेरे साथ,हाथों में लेके तेरा हाथ
तेरे संग .........
धेनु चराती,सुनती मुरली तान
और बैठ वट-वृक्ष की छाँव
होती सदा तेरे संग......
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